आरकेएम पावरजेन के मालिकों की 1900 करोड़ की संपत्ति अटैच
रायगढ़। प्रवर्तन निदेशालय ने डभरा के पास उच्चपिंडा में स्थित आरकेएम पावरजेन के मालिकों की करीब 1900 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। कोल ब्लॉक आवंटन को आधार बनाकर धोखाधड़ी करते हुए फंड डायवर्ट किए। कंपनी को रायगढ़ जिले में ही फतेहपुर ईस्ट कोल ब्लॉक आवंटित हुआ था। वर्ष 2005 से 2014 के बीच कई ऐसी कंपनियों ने पावर प्लांट स्थापित करने के लिए अपनी आर्थिक स्थिति की झूठी जानकारी दी। बिना पावर प्लांट के कोल ब्लॉक आवंटित करवा लिए गए। इसके आधार पर बैंकों से भारी भरकम कर्ज भी ले लिया गया। इस फंड को डायवर्ट कर निजी संपत्तियां बनाई गईं।
कंपनी दिवालिया हो गई तो उसे कम कीमत पर नीलाम कर दिया। बैंकों को हजारों करोड़ का नुकसान अब तक हो रहा है। ऐसे ही एक फंड डायवर्सन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने आरकेएम पावरजेन के मालिकों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। प्लांट में भी जांच की गई। उच्चपिंडा में आरकेएम पावरजेन प्रालि ने 1440 मेगावाट का पावर प्लांट स्थापित किया है। कंपनी को धरमजयगढ़ का फतेहपुर ईस्ट कोल ब्लॉक बिजली उत्पादन के लिए आवंटित हुआ था। कोल ब्लॉक आवंटन को ही आधार बनाकर आरकेएम पावरजेन ने पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से ऋण लिया। एमआईपीपी नामक एक विदेशी संस्था को 3,800 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जिसका इस्तेमाल प्लांट मशीनरी खरीदने के लिए करना बताया गया।
इसके बाद मलेशिया की मुदजाया कॉर्पोरेशन बीएचडी को 26 प्रश शेयर और एनर्क इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड को 10.95 प्रश शेयर 240 रुपए प्रति शेयर के प्रीमियम पर दिए। 63 प्रश शेयर आरके पावरजेन को ट्रांसफर किए गए। इसका मूल्यांकन संदेहास्पद था जहां से ईडी ने जांच शुरू की। पीएफसी से लिए गए हजारों करोड़ के फंड को इधर से उधर घुमाया गया। अंत में 1800 करोड़ रुपए इक्विटी भागीदारी की आड़ में विदेशी संस्थाओं के माध्यम से आरकेएम पावरजेन को वापस मिल गए।
कई दस्तावेज, डिजिटल डिवाईस बरामद
ईडी ने पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के तहत आरकेएम पावरजेन के डायरेक्टर अंडाल अरुमुगम, एस अरुमुगम व अन्य के ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम सबूत जब्त किए हैं। कंपनी के अन्य निदेशकों में जोसेफ गोमेज, शैलेंद्र भटनागर, शिवाराजन कुप्पा राजू, अनिरुद्ध दत्ता, धनबलन रवि, अदिति राजा आदि हैं। चेन्नई में तीन स्थानों पर तलाशी अभियान के दौरान 912 करोड़ रुपए की सावधि जमा रसीदें (एफडीआर) और म्यूचुअल फंड फ्रीज किए गए। कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए, जिनकी कुल कीमत लगभग 1000 करोड़ रुपए है।


