
Netagiri.in___Renu jaiswal ____सक्ति/डभरा | छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी प्रबंधन पर शिकंजा कस दिया है। औद्योगिक सुरक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेन्द्र पटेल समेत अन्य 19 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ डभरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
![]()
सुरक्षा से समझौता बना हादसे की वजह जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट में उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। हादसे के समय बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर सीधे 590 मेगावाट कर दिया गया, जिससे सिस्टम का संतुलन बिगड़ गया और जोरदार विस्फोट हुआ। तकनीकी खराबी की चेतावनी के बावजूद प्लांट को बंद नहीं किया गया। 20 मजदूरों की मौत, कई की हालत गंभीर इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 से अधिक घायल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।
मृतकों में कई प्रवासी मजदूर शामिल हैं, जिससे कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मुआवजा और नौकरी का ऐलान हादसे के बाद कंपनी और सरकार ने राहत की घोषणा की है— वेदांता प्रबंधन: मृतकों के परिजनों को ₹35 लाख और एक सदस्य को नौकरी गंभीर घायलों को ₹15 लाख और इलाज के दौरान वेतन राज्य
सरकार: ₹5 लाख केंद्र सरकार (PMNRF): ₹2 लाख 30 दिन में जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट 30 दिनों में सौंपी जाएगी। श्रम विभाग ने साफ कहा है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

सुरक्षा से समझौता बना हादसे की वजह जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट में उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। हादसे के समय बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर सीधे 590 मेगावाट कर दिया गया, जिससे सिस्टम का संतुलन बिगड़ गया और जोरदार विस्फोट हुआ। तकनीकी खराबी की चेतावनी के बावजूद प्लांट को बंद नहीं किया गया। 20 मजदूरों की मौत, कई की हालत गंभीर इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 से अधिक घायल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।

