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Supreme Court Hearing on Gyanesh Kumar and SIR: ज्ञानेश कुमार-SIR विवाद में नया अपडेट, अब 17 नवंबर को हो सकती है अगली सुनवाई

नई दिल्ली: Supreme Court Hearing on Gyanesh Kumar and SIR: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टल गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को इन मामलों पर सुनवाई होनी थी। हालांकि, याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग (ECI) की ओर से दाखिल हलफनामे पर जवाब देने के लिए समय मांगा। इसके बाद अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत दे दी। मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर 2026 को होने की संभावना है।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज, SIR से जुड़े फैसलों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को चुनौती दी है। वहीं, चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR से संबंधित फैसले आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए थे।

Supreme Court Hearing on Gyanesh Kumar and SIR

SIR मामले में याचिकाकर्ता को मिली 10 दिन की मोहलत

मुख्य याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। इसके साथ ही अदालत ने चुनाव आयोग को अन्य याचिकाओं पर भी अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

दरअसल, इस मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और 13 विपक्षी नेताओं सहित विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर सवाल उठाए गए हैं।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपने फैसलों का बचाव किया था। आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित तीनों आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को भी निराधार बताया है।

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फॉर्म 6 विवाद पर चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

SIR विवाद के बीच मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सांसद डोला सेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत में दलील दी कि ऑनलाइन फॉर्म 6 में कथित बदलाव और चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस नोट में यह संकेत दिया गया था कि अदालत ने फॉर्म में किए गए बदलावों को मंजूरी दी है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस मामले की जांच करेगी और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया जा रहा है।

यह विवाद मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया और SIR के दौरान मांगी जाने वाली अतिरिक्त जानकारी से जुड़ा है।

चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा?

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। आयोग की प्रमुख दलीलें इस प्रकार हैं:

  • SIR के फैसले सर्वसम्मति से: आयोग के मुताबिक, SIR से जुड़े तीनों प्रमुख आदेश सभी सदस्यों की सहमति से जारी किए गए थे।
  • फॉर्म 6 में बदलाव नहीं: चुनाव आयोग ने कहा कि निर्धारित फॉर्म 6 में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया है। इसके अनुसार, फॉर्म में संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
  • एकतरफा फैसलों के आरोप खारिज: आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अकेले फैसले नहीं लिए।
  • याचिका के आधार पर सवाल: आयोग का कहना है कि याचिकाकर्ताओं के आरोप एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित हैं और रिपोर्ट अपने आप में आरोपों को साबित करने वाला कानूनी साक्ष्य नहीं है।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि फॉर्म 6 के साथ SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा को ऑनलाइन जिस तरह प्रदर्शित किया गया, उससे उसमें संशोधन किए जाने का भ्रम पैदा हो सकता था। हालांकि, आयोग ने फॉर्म में औपचारिक बदलाव किए जाने के आरोप से इनकार किया है।

कैसे शुरू हुआ ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद?

ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद उस समय बढ़ा, जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि SIR से संबंधित कुछ फैसलों और फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कथित तौर पर फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर आपत्ति जताई थी। इस बदलाव के तहत आवेदकों से खुद को या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी और नाना-नानी को पिछली SIR प्रक्रिया से जोड़ने वाली जानकारी देने को कहा गया था।

इसके बाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठे। मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही संबंधित पक्षों से जवाब मांग चुका है। हालांकि, इन आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।

17 नवंबर को हो सकती है अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया है। आयोग को भी अन्य याचिकाओं पर जवाब दाखिल करना है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होने की संभावना है। उस सुनवाई में चुनाव आयोग के जवाब और याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर आगे विचार किया जा सकता है।

Netagiri

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