
भोपाल: MP Desi Cow Rearing Scheme 2026: मध्य प्रदेश में देसी गायों के पालन को बढ़ावा देने और पारंपरिक पशु नस्लों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार एक नई योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को देसी गाय पालने पर हर महीने 900 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव है। सरकार की योजना के अनुसार, इसकी शुरुआत 15 नवंबर 2026 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर की जा सकती है। शुरुआती चरण में प्रदेश के 100 गांवों के 500 किसानों को शामिल करने की योजना है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करना, देसी गोवंश की नस्लों को संरक्षित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देना है। हालांकि, योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और सहायता राशि मिलने से जुड़ी अंतिम शर्तों की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही किसान आवेदन की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

हर साल 40 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी
मध्य प्रदेश सरकार इस योजना पर हर साल लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आगामी द्वितीय अनुपूरक बजट में वित्तीय प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। योजना का खाका 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत किया गया था।
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पहले चरण में 500 किसानों का होगा चयन
योजना के शुरुआती चरण में मध्य प्रदेश के 100 प्रमुख गांवों को चुना जाएगा। प्रत्येक गांव से पांच किसानों का चयन करने की योजना है। इस तरह पहले चरण में कुल 500 किसानों को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, अभी किसानों के चयन के विस्तृत मानदंड, आवेदन की तारीख और आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी सामने नहीं आई है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले संबंधित विभाग से आधिकारिक जानकारी प्राप्त करें।
मध्य प्रदेश की इन 6 देसी गायों की नस्लों पर मिलेगा लाभ
इस योजना में मध्य प्रदेश की छह प्रमुख देसी नस्लों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
1. निमाड़ी गाय: यह नस्ल मुख्य रूप से खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार के निमाड़ क्षेत्र में पाई जाती है।
2. मालवी गाय: मालवा क्षेत्र की यह नस्ल मंदसौर, शाजापुर, राजगढ़ और उज्जैन के आसपास पाई जाती है।
3. केनकथा गाय: इसे केनवारी भी कहा जाता है। यह नस्ल बुंदेलखंड के पन्ना, छतरपुर और केन नदी के आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है।
4. गाओलाओ गाय: यह नस्ल मुख्य रूप से महाराष्ट्र की सीमा से लगे छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट के आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है।
5. महाकौशली गाय: यह नस्ल जबलपुर, मंडला, डिंडोरी और सिवनी सहित महाकौशल क्षेत्र में पाई जाती है।
6. गढ़ी-खेरी गाय: यह नस्ल महाकौशल के आदिवासी बहुल इलाकों, खासकर छिंदवाड़ा, मंडला और डिंडोरी के क्षेत्रों में पाई जाती है।
देसी गाय पालने वाले किसानों को क्या करना चाहिए?
जो किसान इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें फिलहाल इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- योजना से संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों का इंतजार करें।
- अपने जिले के पशुपालन विभाग या नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से जानकारी लें।
- गाय की नस्ल और पशुपालन से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें।
- आवेदन प्रक्रिया और पात्रता की पुष्टि होने के बाद ही आवेदन करें।


