
कोरबा/छत्तीसगढ़__सरकारी आदेशों की अनदेखी का एक और मामला कोरबा जिला पंचायत से सामने आया है, जहाँ स्थानांतरण होने के बावजूद सहायक परियोजना अधिकारी मोहनीश आनंद अब तक अपने महत्वपूर्ण और मलाईदार पद पर बने हुए हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि शासन के आदेशों की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करती है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मंत्रालय रायपुर द्वारा 29 सितंबर 2025 को जारी स्थानांतरण सूची में मोहनीश आनंद का नाम शामिल है। आदेश के अनुसार उनका नवीन पदस्थापन जिला पंचायत सूरजपुर में किया गया है। इसके बावजूद आज तक उन्हें जिला पंचायत कोरबा से कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
इस पूरे मामले ने कई सवालों को जन्म दे दिया है—
क्या मोहनीश आनंद का कोरबा से मोह प्रशासन पर भारी पड़ रहा है?




या फिर स्थानांतरण रुकवाने के लिए भीतरखाने कोई प्रयास किए जा रहे हैं?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि स्पष्ट आदेश होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे?
उल्लेखनीय है कि सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय द्वारा 01 जनवरी 2024 के आदेश का हवाला देते हुए 07 जनवरी 2026 को सभी विभाग प्रमुखों एवं जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। पत्र में कहा गया था कि जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्थानांतरण हो चुका है, वे 13 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से अपनी नवीन पदस्थापना पर पदभार ग्रहण करें, अन्यथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इसके बावजूद न तो आदेश का पालन हुआ और न ही कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है। मोहनीश आनंद अब भी जिला पंचायत कोरबा में सहायक परियोजना अधिकारी के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं, जो प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन कब तक अपने ही आदेशों को नजरअंदाज करता रहेगा और क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


