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छत्तीसगढ़

कोरबा रीपा विवाद: जांच जारी, फिर भी विवादित फर्म को भुगतान की तैयारी!

  • कोरबा रीपा विवाद: जांच जारी, फिर भी विवादित फर्म को भुगतान की तैयारी!​कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ‘महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क’ (रीपा) को कोरबा जिले के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और रायपुर की एक चहेती अपात्र फर्म ने मिलकर अपनी ‘कमाई का जरिया’ बना लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस महाघोटाले की जांच राज्य स्तर की समिति, जिला समिति और खुद महालेखाकार कार्यालय के ऑडिट के अधीन है, फिर भी जिले के कुछ साहबान नियमों को ताक पर रखकर M/S RAM SAA ALLIED ENTERPRISE PRIVATE LIMITED को करोड़ों रुपये का अंतिम भुगतान करने की फिराक में हैं!
    ​सवाल यह उठता है कि आखिर इन अधिकारियों की ऐसी क्या मजबूरी है कि वे जांच पूरी होने से पहले ही भुगतान करने के लिए इतने उतावले हैं? क्या पर्दे के पीछे कोई बड़ी डील हो चुकी है, या फिर अधिकारियों की प्रतिष्ठा अब इस विवादित फर्म के हाथों गिरवी रखी जा चुकी है?
    ​गंभीर आरोप: स्व-सहायता समूहों से जबरन ‘ब्लैंक चेक’ और ‘ब्लैंक कार्यआदेश’ पर कराए हस्ताक्षर!
    ​दस्तावेजों के अनुसार, इस घोटाले की कार्यप्रणाली इतनी शातिर थी कि स्व-सहायता समूहों और ग्राम पंचायतों (चिर्रा, सराईडीह, पहन्दा, रंजना, कोटमेर, जमनीपाली, नोनबिरा, कापू बहरा, सेमरा,अरदा) की गरीब महिलाओं और जन प्रतिनिधियों को गुमराह किया गया। उन पर दबाव बनाकर ‘ब्लैंक चेक’ और ‘ब्लैंक कार्यआदेश’ पर हस्ताक्षर करा लिए गए और करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।
    ​जनता पूछती है: “क्या शासकीय कुर्सियों पर बैठे अधिकारियों की नैतिकता इतनी मर चुकी है कि उन्हें गरीब महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के आंसुओं और उनके हक के पैसों की लूट दिखाई नहीं दे रही? क्या वे सिर्फ एक अपात्र ठेकेदार के ‘एजेंट’ बनकर काम कर रहे हैं?”

    ​जांच लंबित, फिर भुगतान की जल्दबाजी क्यों?
    ​सूचना के अधिकार और प्रथम अपीलीय अधिकारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नवा रायपुर के आदेशों के स्पष्ट दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि इस पूरे मामले की वित्तीय लेनदेन की सूक्ष्म जांच प्रक्रिया अभी भी जारी है।
    ​महालेखाकार ऑडिट की सिफारिश: इस घोटाले के ऑडिट हेतु महालेखाकार कार्यालय को अनुशंसा की गई है।
    ​मनी लॉन्ड्रिंग का अंदेशा: नियमों के विपरीत एकमुश्त रीपा निर्माण राशि को अलग-अलग टुकड़ों में बांटकर ताकि 50 लाख से कम दिखाकर अपात्र फर्म को काम दिया जा सके ट्रांजेक्शन किया गया, जो सीधे तौर पर वित्तीय हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है।
    ​प्रशासनिक हलकों में सुगबुगाहट:
    यदि इस चरण पर जिला प्रशासन और संबंधित जनपदों (कोरबा, करतला, कटघोरा, पाली, पोड़ी उपरोड़ा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भुगतान नहीं रोकते हैं, तो यह सीधे तौर पर साबित हो जाएगा कि वे भी इस भ्रष्टाचार के बराबर के भागीदार हैं। भुगतान होने की स्थिति में दोषी राशि लेकर फरार हो जाएंगे और सरकारी खजाने को अपूरणीय क्षति होगी।
    ​अब गेंद कलेक्टर और जिला प्रशासन के पाले में
    ​शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी प्रमाणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है। यदि जिला प्रशासन इस विवादित फर्म M/S RAM SAA ALLIED ENTERPRISE PRIVATE LIMITED के सभी भुगतानों पर तत्काल प्रभाव से रोक नहीं लगाता है, तो यह कलेक्टोरेट और जिला पंचायत कोरबा की साख पर एक ऐसा बदनुमा दाग होगा, जिसे कोई भी स्पष्टीकरण धो नहीं पाएगा।
    ​क्या कोरबा के जिम्मेदार अधिकारी अपनी बची-कुची प्रतिष्ठा बचाते हुए तत्काल इस भुगतान को रोकेंगे, या फिर वे जनता के टैक्स के पैसे को अपनी आंखों के सामने लुटता देखकर मूकदर्शक बने रहेंगे? फैसला उन्हें खुद करना है!

Netagiri

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