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Supreme Court NCLT NCLAT News: सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार को दो टूक, NCLT-NCLAT की नियुक्तियों में मिले अधिक स्वतंत्रता

नई दिल्ली: Supreme Court NCLT NCLAT News: सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (NCLAT) की स्वायत्तता को लेकर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय पर तीखी टिप्पणी की है। 30 अक्टूबर 2026 को संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि मंत्रालय इन दोनों महत्वपूर्ण न्यायाधिकरणों पर पूरी तरह नियंत्रण रखना चाहता है। अदालत ने इसे संस्थाओं की स्वायत्तता में हस्तक्षेप बताया।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों को भर्ती प्रक्रिया में अधिक स्वतंत्रता देने की वकालत की। साथ ही, अदालत ने संविदा कर्मचारियों की समस्याओं और नियमित नियुक्तियों की जरूरत पर भी विचार किया।

Supreme Court NCLT NCLAT News

NCLT और NCLAT पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी की मुख्य वजह ट्रिब्यूनल में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर उठे सवाल हैं। अदालत के सामने यह मुद्दा आया कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए एक निजी कंपनी की सेवाएं लेने का फैसला किया है। इससे लंबे समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि NCLT और NCLAT के अध्यक्षों को अपने संस्थानों में नियुक्तियों के संबंध में पूरी स्वायत्तता मिलनी चाहिए। अदालत के मुताबिक, मंत्रालय का अत्यधिक नियंत्रण इन न्यायाधिकरणों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।

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UPSC और SSC के जरिए नियमित भर्ती का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने NCLT और NCLAT में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए दीर्घकालिक समाधान अपनाने पर जोर दिया। अदालत ने सुझाव दिया कि अनुभवी सरकारी अधिकारियों को शुरुआती तौर पर प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर नियुक्त किया जा सकता है।

इसके बाद चरणबद्ध तरीके से नियमित भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की सहायता लेने का सुझाव दिया गया।

अदालत का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ाने और न्यायाधिकरणों के कामकाज को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

छह साल से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों ने क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि कई कर्मचारी लगभग छह साल से NCLT और NCLAT में काम कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि संविदा पर काम करने का यह मतलब नहीं है कि कर्मचारियों के कोई अधिकार नहीं हैं।

वकील के अनुसार, मौजूदा कर्मचारियों को हटाकर निजी कंपनी के माध्यम से नए कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने की आशंका है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि कर्मचारियों को अचानक नौकरी से हटाने पर रोक लगाई जाए।

उन्होंने यह भी दलील दी कि यदि भर्ती नियमों और विज्ञापन में नियमितीकरण का प्रावधान है, तो कर्मचारियों को पूरी तरह बाहर करना मनमाना हो सकता है। याचिकाकर्ताओं ने इस संबंध में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का भी हवाला दिया।

संविदा कर्मचारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने केवल लंबे समय तक संविदा पर काम करने के आधार पर कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखने के पक्ष में अंतरिम राहत देने से इनकार किया। सीजेआई सूर्यकांत ने संविदा नियुक्तियों और ठेकेदारों के माध्यम से होने वाली भर्ती पर भी सवाल उठाए।

सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई में एक मामले में संविदा कर्मचारी मूल रिपोर्ट लेकर चले गए थे, जिसके बाद एफआईआर दर्ज करानी पड़ी थी। उन्होंने कुछ कर्मचारियों के व्यवहार और न्यायिक सदस्यों के साथ उनके कथित बर्ताव पर भी चिंता जताई।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में केवल मौजूदा कर्मचारियों की नौकरी बचाने के बजाय दोनों न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता और बेहतर कामकाज जैसे व्यापक मुद्दों पर भी विचार करना जरूरी है।

NCLT और NCLAT के कामकाज पर क्या होगा असर?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि मामला केवल संविदा कर्मचारियों की नौकरी तक सीमित नहीं है। अदालत नियुक्तियों की प्रक्रिया, प्रशासनिक स्वतंत्रता और न्यायाधिकरणों की बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान दे रही है।

अदालत ने NCLT और NCLAT के अध्यक्षों से कर्मचारियों, भवनों, जमीन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जरूरतों पर विस्तृत प्रस्ताव पेश करने को कहा है। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। केंद्र सरकार से भी दोनों संस्थानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है।

Netagiri

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