
कोरबा___ग्राम पंचायत धनगांव में 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस कथित भ्रष्टाचार का आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पूर्व सरपंच और पंचों ने स्वयं पंचायत सचिव एवं करारोपण अधिकारी पर लगाया है।
पूर्व सरपंच बुधकुंवर एवं पंचायत के पूर्व पंचों ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल 2020 से 2025 के दौरान प्राप्त 15वें वित्त की लगभग ₹13,00,000 (तेरह लाख रुपये) की राशि को पंचायत सचिव बदन सिंह कंवर (सेवानिवृत्त) और जनपद पंचायत कोरबा में पदस्थ करारोपण अधिकारी श्री डड़सेना ने आपसी मिलीभगत से आहरण कर लिया।
शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राशि निकाले जाने के बावजूद ग्राम पंचायत में कोई भी ठोस विकास कार्य नहीं कराया गया। जो कार्य प्रारंभ किए गए, उन्हें भी अधूरा छोड़ दिया गया। आरोप है कि सचिव बदन सिंह कंवर ने सेवानिवृत्ति से ठीक एक-दो सप्ताह पहले करारोपण अधिकारी के साथ मिलकर पूरी राशि का आहरण कर लिया।
पूर्व सरपंच और पंचों का यह भी कहना है कि 15वें वित्त की राशि से विकास कार्य कराने के लिए पंचायत में कई बार प्रस्ताव पारित किए गए, लेकिन सचिव और करारोपण अधिकारी की नियत गबन की होने के कारण प्रस्तावों को जानबूझकर लंबित रखा गया।
मामले में एक और गंभीर पहलू यह है कि पूर्व सरपंच और पंचों की 7 माह की मानदेय राशि भी आज तक नहीं दी गई है, जिसे शिकायतकर्ताओं ने जानबूझकर रोके जाने का आरोप लगाया है।
पूर्व जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मांग की है कि 15वें वित्त की राशि के कथित गबन की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और उनकी लंबित मानदेय राशि तत्काल भुगतान कराई जाए।
अब सवाल यह उठता है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच करेगा या फाइलें दफ्तरों में ही दबकर रह जाएंगी।


