Netagiri.in–***कोरबा। ग्राम दादरखुर्द में कथित ‘उड़ती जमीन’ मामले के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। समाचार प्रकाशन और आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर तहसीलदार कोरबा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व अमले को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए। निर्देशानुसार राजस्व निरीक्षक (RI) और पटवारी की टीम ने विवादित स्थल का भौतिक सत्यापन किया और मौके की स्थिति का जायजा लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम दादरखुर्द में शासकीय भूमि में कथित हेराफेरी कर निजी भूमि को कागजी प्रक्रिया के माध्यम से मुख्य मार्ग स्थित शासकीय भूमि (खसरा नंबर 273 और 274) पर दर्शाने का मामला सामने आया है। इस कथित अनियमितता की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।
जांच के दौरान इन बिंदुओं पर हुआ परीक्षण:
मौके पर वास्तविक कब्जाधारी और राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाम का मिलान।
पुराने नक्शों और वर्तमान भौतिक स्थिति के बीच अंतर का तकनीकी परीक्षण।
वर्ष 2016 में धारा 89 के तहत पारित आदेश की वैधता की जांच, जिसके आधार पर भूमि रिकॉर्ड में परिवर्तन किया गया था।
राजस्व निरीक्षक द्वारा जारी सूचना के अनुसार, 24 फरवरी 2026 को विवादित भूमि का निरीक्षण किया गया। इस दौरान कथित भू-स्वामी पुरुषोत्तम राव घाडगे और हरिहर राव, ग्राम सरपंच, संबंधित वार्ड पार्षद, हल्का पटवारी तथा सीमांकन दल मौके पर उपस्थित रहे। जांच के दौरान खसरा नंबर 1566, 1570 और 1572 सहित अन्य शासकीय भूमि का भी सीमांकन और रिकॉर्ड मिलान किया गया।
बताया जा रहा है कि ये वही खसरा नंबर हैं, जिन्हें कथित रूप से उनके मूल स्थान से हटाकर मुख्य मार्ग खरमोरा स्थित करोड़ों रुपए मूल्य की शासकीय भूमि खसरा नंबर 273 और 274 में दर्ज कर दिया गया। हालांकि, जांच में सामने आए तथ्यों को लेकर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
FIR की मांग, अधिकारियों पर भी आ सकती है जांच की आंच
शिकायतकर्ता ने मामले में केवल रिकॉर्ड सुधार नहीं, बल्कि आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की भी मांग की है। उनका आरोप है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इस तरह की कार्रवाई संभव नहीं है। यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है, तो तत्कालीन संबंधित अधिकारियों, पटवारी और राजस्व निरीक्षक की भूमिका की भी जांच हो सकती है।
रिकॉर्ड निरस्त कर जमीन वापस लेने की संभावना
सूत्रों के अनुसार, यदि भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित रिकॉर्ड को निरस्त कर शासकीय भूमि को शासन के नाम पर पुनः दर्ज किया जा सकता है। फिलहाल प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय