मृतकों के नाम प्रधानमंत्री आवास, क्या पुनर्जन्म की आस?” अपात्रों के नाम आवास, लेकिन पैसा गया दूसरों के पास,, भावी जनप्रतिनिधियों और सरकारी बाबुओं के भ्रष्टाचार पर अब जांच के बाद होगी एफआईआर
कोरबा में PM आवास योजना में गड़बड़ी का आरोप मृतकों के नाम पर आवास स्वीकृति! ‘पुनर्जन्म’ का सवाल, 76 अपात्र हितग्राहियों के नाम भी योजना में शामिल होने की शिकायत 46 हितग्राहियों को कथित तौर पर पता ही नहीं कि उनके नाम से आवास स्वीकृत; पहली किस्त दूसरे खातों में डालने का आरोप

Netagiri.in—–कोरबा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार की ऐसी इबारत लिखे जाने का आरोप सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। ग्राम पंचायत तिलकेजा में योजना के तहत मृत व्यक्तियों के नाम पर आवास स्वीकृत किए जाने की शिकायत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शिकायत के अनुसार जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम पर भी आवास स्वीकृत किए गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब हितग्राही ही इस दुनिया में नहीं हैं,तो उनके नाम पर आवास स्वीकृति कैसे हुई? क्या सरकारी रिकॉर्ड में मृतकों का ‘पुनर्जन्म’ हो गया?
मृतकों के नाम पर आवास, सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल
ननकी राम कंवर के करीबी वरिष्ट नेता की मृतक मां उर्मिला सोनी के नाम से भी आवास स्वीकृत लेकिन पहली किस्त गई किसी टंडन के खाते में
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शिकायत कर्ता के आरोप है कि ग्राम पंचायत तिलकेजा में मृत व्यक्तियों के नाम पर आवास स्वीकृत किए गए हैं। इससे योजना की पात्रता जांच और हितग्राहियों के दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब जांच का विषय यह है कि आवास स्वीकृति से पहले हितग्राहियों के नाम, दस्तावेज और वास्तविक स्थिति का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
76 अपात्र लोगों के नाम पर आवास स्वीकृति का आरोप

मामला केवल मृतकों के नाम तक सीमित नहीं है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत में सरपंच, सचिव और योजना से जुड़े अधिकारियों की कथित मिलीभगत से करीब 76 अपात्र लोगों के नाम पर भी आवास स्वीकृत किए गए।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इनमें से 46 ऐसे अपात्र हितग्राही हैं, जिन्हें कथित तौर पर यह जानकारी तक नहीं थी कि उनके नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हो चुका है।
पहली किस्त दूसरे खाते में डालने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप आवास की पहली किस्त को लेकर है। शिकायत के मुताबिक, कुछ मामलों में हितग्राहियों के नाम पर स्वीकृत पहली किस्त की राशि किसी अन्य व्यक्ति के खाते में डालकर राशि की बंदरबांट किए जाने का आरोप है।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पूर्व जनपद सदस्य शकुंतला केवर्तऔर RTI कार्यकर्ता जीतेन्द्र साहू ने उठाई आवाज

मामले को लेकर गांव की पूर्व जनपद सदस्य शकुंतला केवर्त और RTI कार्यकर्ता जितेंद्र साहू ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत कर पूरे मामले की जांच की मांग की।
शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
CEO प्रतीक जैन ने गठित की जांच टीम

कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत पहुंचने के बाद जिला पंचायत CEO प्रतीक जैन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला स्तरीय जांच टीम गठित कर दी है। टीम द्वारा अब पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
जांच में हितग्राहियों की पात्रता, आवास स्वीकृति, दस्तावेजों के सत्यापन और किस्तों के भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी।
दोषियों पर FIR से रिकवरी तक कार्रवाई ….जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन
जिला पंचायत CEO प्रतीक जैन का कहना है कि जांच में यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ FIR से लेकर शासकीय राशि की रिकवरी तक की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि शासन की किसी भी योजना में गड़बड़ी को प्रशासन बर्दाश्त नहीं करेगा।
अब जांच से खुलेगा पूरा राज
तिलकेजा ग्राम पंचायत में सामने आई शिकायत ने प्रधानमंत्री आवास योजना की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतकों के नाम पर आवास कैसे स्वीकृत हुए?
76 अपात्र लोगों के नाम योजना में कैसे शामिल हुए?
46 हितग्राहियों को अपने नाम पर आवास स्वीकृत होने की जानकारी क्यों नहीं थी?
और पहली किस्त दूसरे खातों में पहुंचने के आरोप में कितनी सच्चाई है?
इन सभी सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच में सामने आएगा।
फिलहाल, तिलकेजा का यह मामला ‘मृतकों के नाम पर आवास’ और ‘पुनर्जन्म’ जैसे सवालों के कारण चर्चा में है और अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।


