कोरबा। फ्लोरा मैक्स का मामला दिल्ली पहुंच गया है। छग के पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर की शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को नोटिस भेजते हुए 15 दिवस के अंदर जवाब मांगा है। जवाब नहीं आने पर केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अपने शक्ति का प्रयोग कर 338 क का उपयोग करते हुए मुख्य सचिव को समन जारी कर सकता है। नोटिस आने के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आ गया है।
भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अतर सिंह आर्य से मुलाकात कर कोरबा सहित अन्य जिलों में फ्लोरा मैक्स कंपनी एवं उसके लोगों के द्वारा की गई ठगी पर ध्यानाकर्षण कराया गया। कोरबा जिले में करीब 40000 महिलाओं के साथ ठगी व धोखाधड़ी होने की शिकायत करते हुए बताया गया कि कोरबा जिले में कितनी महिलाओं के साथ में ठगी हुआ है, कितने रुपए का ठगी हुआ है, इसकी जानकारी जिला प्रशासन के पास नहीं है एवं सभी थाना-चौकी क्षेत्र में महिलाओं की शिकायत दर्ज नहीं किया जा रहा है जबकि सभी थाना- चौकी क्षेत्र में अलग-अलग लोगों ने फ्लोरा मैक्स का नाम लेकर महिलाओं से ठगी किया है। इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता होने के बाद भी केवल जिले के कार्यरत फ्लोरा मैक्स से जुडे लोगो पर FIR किया गया है लेकिन क्षेत्र स्तर पर महिलाओं को ठगने वाले लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है जो चिंता का विषय है ननकी राम कमर के पात्रों को संज्ञान में लेते हुए अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अतर सिंह ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है जिसमें 15 दिन के अंदर जवाब मांगा गया है नोटिस में लिखा है कि
फलोरामेक्स फर्जी कंपनी के द्वारा कोरबा जिले (छत्तीसगढ़) के 400000 से अधिक महिला समूह (ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़े आदिवासी महिलाओं से ठगी कर अरबों रूपये का घोटाला की जांच केन्द्रीय जांच एंजेसी से कराकर दोषियों पर कार्रवाई करते हुए पीड़ित महिलाओं को राहत दिलाने के संबंध में श्री ननकी राम कवंर, पूर्व विधायक तथा पूर्व गृह जेल एवं – सहकारिता मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, कोरबा (छत्तीसगढ़) का दिनांक 09.12.2024 का पत्र/ अभ्यावेदन ।
चूंकि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को श्री ननकी राम कंवर से दिनांक 09/12/2024 में एक याचिका/ शिकायत/सूचना प्राप्त हुई है (प्रति संलग्न) और आयोग ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 338क के अंतर्गत उसे प्रदत्त शक्तियों का अनुसरण करते हुए इस मामले का अन्वेषण/जांच करने का निश्चय किया है, अतः आपसे एतद्द्वारा अनुरोध किया जाता है कि आप सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अंदर अधोहस्ताक्षरी को डाक से या वैयक्तिक रूप से उपस्थित होकर या किसी अन्य संचार साधन से संबन्धित आरोपों/मामलों और सूचनाओं पर की गई कार्यवाही से संबन्धित सूचना प्रस्तुत करें।
कृपया ध्यान रखें कि यदि नियत अवधि में आयोग को आपका उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 338क के अंतर्गत उसे प्रदत्त सिविल न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग कर सकता है तथा वैयक्तिक रूप से या प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए आपको ‘समन’ जारी कर सकते हैं



