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देशराजनीति

राहुल गांधी लहरा रहे थे संविधान की कॉपी, संसद में मिली नोटों की गड्डी: बीजेपी ने जांच की मांग की, कांग्रेस ने जताई आपत्ति…. आपस में उलझे पक्ष-विपक्ष के सांसद… क्या सांसद में नोट की गड्डी ले जाने पर कार्यवाही का है नियम … पढ़िए पूरी खबर

 

शीतकालीन सत्र के नौवें दिन, शुक्रवार (6 दिसंबर), संसद में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन में जानकारी दी कि सीट नंबर 222 से 500 रुपये के नोटों की गड्डी बरामद हुई है। यह सीट कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को अलॉट की गई है। इस ऐलान के बाद सदन में हंगामा मच गया।

ठीक उसी समय संसद परिसर में राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेता काला मास्क लगाकर मार्च कर रहे थे. राहुल गांधी में संविधान की कॉपी लहरा रहे थे. बीजेपी ने अब कांग्रेस पर जबरदस्त हमला बोला है.

बीजेपी ने की जांच की मांग
सत्ताधारी भाजपा ने इस मामले को गंभीर बताया और पूरी जांच कराने की मांग की। संसदीय कार्य मंत्री किरें रिजिजू और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे असाधारण घटना करार देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भाजपा ने इसे संसद की गरिमा से जुड़ा मामला बताया और जोर दिया कि इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

जेपी नड्डा ने कहा, जब देश डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है, तो सदन में नकदी लाना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह संसद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।

सिंघवी की सफाई: मेरे पास 500 रुपये का ही नोट रहता है
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा, जब मैं राज्यसभा जाता हूं, तो मेरे पास सिर्फ 500 रुपये का एक नोट होता है। यह पहली बार है जब मैंने सुना कि किसी सीट से नकदी बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि घटना के समय वह सदन में मौजूद नहीं थे और इस मामले में उनका नाम घसीटना अनुचित है।

खड़गे : बिना जांच नाम लेना गलत
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर सभापति द्वारा कांग्रेस सांसद का नाम लिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी का नाम लेना संसद की कार्यप्रणाली के खिलाफ है। खड़गे ने इस घटना को “चिल्लर काम बताते हुए इसे संसद की छवि खराब करने वाला करार दिया।
विपक्ष का प्रदर्शन, सत्ता पक्ष का पलटवार

इस घटना ने विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच भारी बहस को जन्म दिया। कांग्रेस सांसदों ने जय संविधान के नारे लगाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। वहीं, भाजपा ने इसे विपक्ष की जिम्मेदारी करार दिया और कांग्रेस पर निशाना साधा है

क्या संसद में नोट नहीं ले जा सकते?

संसद में नोट लाने या नहीं लाने का कोई नियम नहीं है. कोई भी सांसद अंदर कितनी करंसी ले जा सकता है, इसकी भी कोई सीमा नहीं है. बहुत से ऐसे सांसद हैं जो डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल नहीं करते हैं, वो संसद के अंदर बैंक की ब्रांच से पैसे निकालते हैं और चैंबर में ले जाते हैं.

जांच किस बात की होगी?

जांच इस बात की होगी कि सीट के पास नोटों की ये गड्डी कहां से आई. अभिषेक मनु सिंघवी ने दावा किया है कि वो सिर्फ 500 का नोट लेकर सदन में जाते हैं. इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है. हालांकि, अब ये सब राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पर निर्भर करता है कि वो इसकी जांच दिल्ली पुलिस को सौंपते हैं या किसी और एजेंसी को.

जब संसद में उछाले गए थे नोट

अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर वाम दलों ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. उस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे. यूपीए ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया.

उसी दिन बीजेपी के तीन सांसद- अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगौरा लोकसभा में एक करोड़ रुपये के नोटों की गड्डियां लेकर पहुंच गए. वहां उन्होंने नोट उछाल दिए. तीनों ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने उन्हें विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में वोट देने के लिए रुपये की पेशकश की थी. हालांकि, दोनों ने इन आरोपों को नकार दिया था.

उस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने दावा किया था कि सांसदों को तीन-तीन करोड़ रुपये का लालच दिया था. एक करोड़ रुपये पहले दिए गए थे और बाकी की रकम बाद में देने का आश्वासन दिया गया था.

ये पहला मौका था जब सदन में इस तरह से खुलेआम नोटों की गड्डियां उड़ाई गई थीं. इस घटना पर तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया था.

Netagiri

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