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छत्तीसगढ़

जिला लाइवलीहुड कॉलेज में फर्जीवाड़े का खुलासा, शिकायतकर्ता ने सहायक परियोजना अधिकारी मयंक शुक्ला और लेखापाल ऋचा अग्रवाल पर कार्रवाई की मांग

जांजगीर। जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज जांजगीर-चांपा में संचालित मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना (सीएमकेवीवाई) एवं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। हाल ही में एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें छात्रों की अनुपस्थिति के बावजूद उनकी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज की जा रही है और वह भी फिंगरप्रिंट क्लोनिंग के जरिए।

यह घोटाला कथित रूप से सहायक परियोजना अधिकारी मयंक शुक्ला और लेखापाल ऋचा अग्रवाल की निगरानी में हो रहा है। शिकायतकर्ता प्रशांत राठौर द्वारा कलेक्टर को भेजे गए पत्र व वीडियो में बताया गया है कि कॉलेज परिसर में लगे 14 से 15 सीसीटीवी कैमरों के सामने खुलेआम यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। आरोप है कि इन अधिकारियों की मौन सहमति और ट्रेनिंग पार्टनरों की मिलीभगत से फिंगरप्रिंट्स के क्लोन तैयार किए गए हैं, जिनसे अनुपस्थित छात्रों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है।

इस गड़बड़ी का सीधा फायदा ट्रेनिंग पार्टनरों को मिल रहा है, जो छात्रों की फर्जी उपस्थिति के आधार पर सरकारी धन का लाभ ले रहे हैं। प्रशिक्षण न होने के बावजूद बैच डिलीट नहीं होते और उन्हें भुगतान मिलता रहता है। यह न केवल शासन को आर्थिक नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि उन जरूरतमंद युवाओं को भी नुकसान हो रहा है, जिन्हें वास्तव में इन योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।

फिंगरप्रिंट क्लोनिंग जैसी तकनीक का इस प्रकार का दुरुपयोग न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह तकनीक और भी गंभीर आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकती है।

शिकायतकर्ता प्रशांत राठौर ने कलेक्टर से मांग की है कि दोषी अधिकारियों मयंक शुक्ला और ऋचा अग्रवाल को तत्काल बर्खास्त किया जाए और ट्रेनिंग पार्टनरों पर प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने अपने पत्र में यह भी आग्रह किया है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए ताकि अन्य स्थानों पर भी इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

यह मामला अब केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे कौशल विकास ढांचे पर सवाल खड़ा कर रहा है। यदि इस पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे योजनाओं की साख को गहरा आघात पहुँच सकता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर क्या कदम उठाता है।

Netagiri

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