Netagiri.in—कोरबा –(Renu jaiswal)संवाददाता जिले में डीआरसी (डिलीवरी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) और ट्रांसफर के नाम पर फायरनेस वाहनों को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। जिन वाहनों का संचालन नियमों के तहत नहीं किया जाना चाहिए, उन्हें बार-बार अलग-अलग जिलों में स्थानांतरित कर पुनः डीआरसी कर रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है और इसमें अधिकारियों व दलालों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडवोकेट कुनाल देशमुख ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को शिकायत पत्र भेजा है। शिकायत में बताया गया है कि कुछ वाहन कंपनियां जानबूझकर पुराने वाहनों को नई यूनिटों के नाम पर बेचकर फर्जीवाड़ा कर रही हैं, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, कुछ फाइनेंस कंपनियों द्वारा जब्त किए गए वाहनों को पहले किसी एक जिले में डीआरसी कर रजिस्ट्रेशन कराया जाता है और फिर उन्हें बार-बार दूसरे जिलों में ट्रांसफर कर पुनः बिक्री की जाती है। यह सब मिलकर किया जा रहा है, जिसमें दलालों की भूमिका प्रमुख बताई जा रही है।
इसके अलावा, वाहन स्वामियों को भी बिना जानकारी दिए वाहन का रजिस्ट्रेशन दूसरे नाम पर ट्रांसफर किया जा रहा है। शिकायत में यह भी बताया गया कि परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा आंखें मूंदे रहने से यह गोरखधंधा लगातार बढ़ता जा रहा है।
शिकायत में क्या मांग की गई है?
एडवोकेट देवांगन ने इस मामले में जांच समिति गठित कर पूरे नेटवर्क की जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
जिले में लंबे समय से इस तरह का अवैध ट्रांसफर और डीआरसी का खेल चल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासनिक चुप्पी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह खेल ऐसे ही चलता रहा, तो फर्जी दस्तावेजों पर सड़क पर चलने वाले वाहन गंभीर हादसों का कारण बन सकते हैं और सरकार को कर राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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