बीएड डिग्री और दस्तावेजों के आरोपों पर बड़ा खुलासा होने से पहले दोनों पक्षों का यू-टर्न! कहीं शिक्षा विभाग ने तो नहीं कराती मध्यस्थता हो सकता था बड़ा खुलासा
Netagiri.in----Renu jaiswal....शिक्षा विभाग में कथित फर्जी प्रमाण पत्र और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों पर प्रेस वार्ता थी तय, अचानक दोनों पक्षों ने कदम पीछे खींचे

कोरबा। शिक्षा विभाग में शिक्षकों की बीएड डिग्री, प्रमाण पत्र और दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब मामले से जुड़े दोनों पक्षों ने प्रस्तावित प्रेस वार्ताओं से अचानक यू-टर्न ले लिया। दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रेस वार्ता आयोजित कर अपने-अपने दावों और दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले का खुलासा करने की तैयारी थी, लेकिन निर्धारित समय से पहले ही दोनों प्रेस वार्ताएं स्थगित कर दी गईं।
मामले में खास बात यह थी कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग करने वाले थे। ऐसे में माना जा रहा था कि प्रेस वार्ता में बीएड डिग्री और कथित फर्जी प्रमाण पत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक हो सकते हैं।
पहले पक्ष ने फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच का दावा किया था
सुबह 11:30 बजे तिलक भवन, टीपी नगर में छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष ओमप्रकाश बघेल, बिलासपुर संभागीय अध्यक्ष मोहन लहरी, कोरबा जिलाध्यक्ष नित्यानंद यादव एवं संभागीय पदाधिकारी बलजीत कांत की ओर से प्रेस वार्ता प्रस्तावित थी।
इसमें कथित कूटरचना एवं फर्जी प्रमाण पत्र के माध्यम से बीएड डिग्री हासिल करने वाले शिक्षकों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर जानकारी और दस्तावेज सामने रखने की बात कही गई थी।
एक घंटे बाद दूसरे पक्ष की प्रेस वार्ता
वहीं दोपहर 12:30 बजे छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अनिल रात्रे तथा शिक्षक कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष एवं संरक्षक मुकुंद केशव उपाध्याय की ओर से दूसरी प्रेस वार्ता रखी गई थी।
इसमें बीएड डिग्री को लेकर की गई शिकायत को व्यक्तिगत दुर्भावना से प्रेरित और कथित रूप से झूठा बताते हुए विभागीय जांच की वास्तविक स्थिति सामने रखने की तैयारी थी। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने की बात कही गई थी।
दोनों आमने-सामने… फिर अचानक यू-टर्न क्यों?
एक तरफ कथित फर्जी प्रमाण पत्र और कूटरचना का मामला उठाया जाना था, तो दूसरी तरफ उसी शिकायत को गलत और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए जवाब देने की तैयारी थी।
यानी दोनों पक्षों के पास अपने-अपने दावे, सवाल और दस्तावेज होने की बात सामने आ रही थी। ऐसे में दोनों प्रेस वार्ताओं को लेकर लोगों की नजरें टिकी थीं।
लेकिन ऐन वक्त पर दोनों पक्षों की प्रेस वार्ताएं स्थगित हो गईं।
“अपरिहार्य कारण”… लेकिन कारण क्या?
कोरबा प्रेस क्लब की ओर से दोनों प्रेस वार्ताओं को “अपरिहार्य कारण” बताते हुए स्थगित किए जाने की सूचना दी गई। हालांकि, ऐसा कौन सा कारण सामने आया जिसके चलते दोनों पक्षों को अपने कार्यक्रम स्थगित करने पड़े, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
यहीं से कई सवाल खड़े हो गए हैं—
क्या किसी नए दस्तावेज के सामने आने के बाद दोनों पक्षों ने कदम पीछे खींचे?
क्या विभाग या उच्च अधिकारियों की ओर से कोई नई पहल हुई?
क्या जांच को लेकर पर्दे के पीछे कोई बातचीत चल रही है?
या फिर दोनों पक्ष किसी दूसरे मंच पर अपने दस्तावेज और आरोप सार्वजनिक करने की तैयारी में हैं?
फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।
अब असली खुलासे का इंतजार
बीएड डिग्री और प्रमाण पत्रों से जुड़ा यह विवाद अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। एक पक्ष कथित फर्जी प्रमाण पत्र और कूटरचना की जांच की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष शिकायत को ही कथित रूप से झूठा और दुर्भावनापूर्ण बता रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि दस्तावेजों की जांच में आखिर सच क्या सामने आएगा?
फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप सही हैं या शिकायत ही गलत है—इसका फैसला केवल निष्पक्ष दस्तावेजी जांच से ही हो सकता है।
फिलहाल जिस मामले में दोनों पक्ष बड़े खुलासे की तैयारी में थे, उसी में दोनों का अचानक यू-टर्न चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें अगली प्रेस वार्ता और उन दस्तावेजों पर टिकी हैं, जिनके सामने आने का दावा किया जा रहा था।


