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छत्तीसगढ़

Bastar Olympics 2026 : बस्तर ओलंपिक में दिखेगा खेल और जज्बे का संगम, दिव्यांगों से लेकर आत्मसमर्पित माओवादी तक लेंगे हिस्सा

Bastar Olympics 2026 : जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में खेलों का महाकुंभ यानी बस्तर ओलंपिक 2026 शुरू हो गया है। प्रतियोगिता के तीसरे संस्करण को लेकर खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार 6 लाख से अधिक खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन कराया है। खास बात यह है कि इस आयोजन में नक्सल हिंसा से प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी और आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादी भी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य बस्तर की छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और युवाओं को खेलों के माध्यम से सकारात्मक दिशा देना है।

तीसरे संस्करण में रिकॉर्ड भागीदारी का उत्साह

बस्तर ओलंपिक की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई थी। पहले संस्करण में करीब 1.65 लाख खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया था। वहीं, 2025 में आयोजित दूसरे संस्करण में यह संख्या बढ़कर 3.91 लाख पहुंच गई। तीसरे संस्करण में खिलाड़ियों की भागीदारी में और वृद्धि हुई है। इस बार प्रशासन ने करीब 8 लाख पंजीयन का लक्ष्य रखा था।

तीन चरणों में आयोजित होंगी प्रतियोगिताएं

बस्तर ओलंपिक का आयोजन तीन स्तरों पर किया जा रहा है। इसके तहत खिलाड़ियों को विकासखंड से जिला और फिर संभाग स्तर तक अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

  • विकासखंड स्तर: 1 से 13 नवंबर 2026

  • जिला स्तर: 16 से 25 नवंबर 2026

  • संभाग स्तर: 7 से 11 दिसंबर 2026

इन प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अगले स्तर पर खेलने का अवसर मिलेगा।

11 खेल विधाओं में दिखेगा खिलाड़ियों का दम

इस बार बस्तर ओलंपिक में कुल 11 खेल विधाओं को शामिल किया गया है। इनमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, हॉकी और वेटलिफ्टिंग प्रमुख हैं। इसके अलावा सीनियर महिला वर्ग में रस्साकशी को प्रदर्शनात्मक खेल के रूप में शामिल किया गया है।

प्रतियोगिता में 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाएं जूनियर श्रेणी में हिस्सा ले रहे हैं। वहीं सीनियर वर्ग में महिला और पुरुष खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

दिव्यांग और पुनर्वासित माओवादी भी बनेंगे प्रतिभागी

इस आयोजन की सबसे खास बात इसकी समावेशी भागीदारी है। नक्सली हिंसा के कारण दिव्यांग हुए खिलाड़ियों और आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वासित होकर मुख्यधारा में लौटे लोगों को भी प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। इन प्रतिभागियों को सीधे संभाग स्तरीय मुकाबलों में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य खेलों के जरिए बस्तर के युवाओं को जोड़ना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।

Netagiri

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