
Netagiri.in____नई दिल्ली। Supreme Court of India ने देशभर की बार एसोसिएशनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने जिला न्यायाधीशों को यह अधिकार दिया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली बार एसोसिएशनों की कार्यकारिणी समितियों या गवर्निंग बॉडी में महिला वकीलों को नामित कर सकें, ताकि उनमें कम से कम 30 प्रतिशत महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
यह आदेश न्यायमूर्ति Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने पारित किया। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी बार एसोसिएशन में पर्याप्त संख्या में महिला वकील मौजूद हैं, लेकिन वे किसी कारण से चुनाव नहीं लड़ सकीं, तो जिला न्यायाधीश उन्हें कार्यकारिणी में नामित कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता Jayna Kothari ने अदालत को बताया कि कुछ उच्च न्यायालयों ने विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दी है, जबकि कुछ ने केवल संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार एसोसिएशन अभी भी महिलाओं के लिए तय 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के मानदंड को पूरा नहीं कर पा रही हैं।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि ऐसी स्थिति में जिला न्यायाधीश महिला सदस्यों को नामित कर सकते हैं और इसकी अनुपालन रिपोर्ट संबंधित उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाएगी, जो उसे संकलित कर सुप्रीम कोर्ट को प्रस्तुत करेंगे।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि अब तक केवल 11 उच्च न्यायालयों ने ही इस संबंध में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दी है। शेष 14 उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्राधिकार की सभी बार एसोसिएशनों में महिलाओं को कम से कम 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले।
साथ ही अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था सभी प्रकार की बार एसोसिएशनों—जैसे टैक्स, RERA, DRT और NGT से संबंधित बार—पर भी लागू होगी। न्यायालय ने बताया कि उसके हस्तक्षेप और बार सदस्यों के सहयोग से यह प्रतिनिधित्व पहले ही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और कुछ उच्च न्यायालय बार एसोसिएशनों में लागू किया जा चुका है।



