कोरबा। जिले में बाल विकास विभाग के अंतर्गत चर्चित हो रहे “50 हजार रुपये मांगने” के मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। डीपीओ ने जारी स्पष्टीकरण में कहा है कि यह आरोप पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन हैं, जिन्हें विभागीय कार्यवाही से असंतुष्ट एक अधिकारी द्वारा बदनाम करने की नीयत से प्रचारित किया गया है।
गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को स्थानीय एक दैनिक न्यूज़पेपर और एक न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित खबर में आरोप लगाया गया था कि डीपीओ ने कोरबा ग्रामीण की परियोजना अधिकारी श्रीमती ममता तुली से लंबित प्रकरण निपटाने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की थी।
इस संबंध में डीपीओ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022-23 के अवकाश स्वीकृति प्रकरण को लेकर श्रीमती तुली स्वयं दबाव बना रही थीं। जांच में पाया गया कि परियोजना अधिकारी ने अपनी सर्विस बुक, जो कि जिला कार्यालय में सुरक्षित रहनी चाहिए थी, उसे बिना अनुमति के अपने पास रखा और उसमें बिना सक्षम स्वीकृति के अवकाश की प्रविष्टि कराई। जब यह तथ्य सामने आया तो कार्यालय द्वारा 8 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद 16 जुलाई को पुनः नोटिस भेजा गया, परंतु जवाब नहीं मिलने पर 7 अक्टूबर को चेतावनी पत्र जारी करना पड़ा।
डीपीओ के अनुसार 8 अक्टूबर को आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में उन्हें परियोजना अधिकारी को कार्य के प्रति सचेत रहने की हिदायत देनी पड़ी थी। इसी बैठक के बाद, अगले दिन मीडिया में रिश्वत मांगने की झूठी खबरें प्रसारित कराई गईं। डीपीओ ने कहा कि “मैंने और लिपिक शिव शर्मा ने किसी भी प्रकार का प्रताड़नात्मक व्यवहार या आर्थिक मांग नहीं की। यह शिकायत व्यक्तिगत द्वेषवश की गई है।”
डीपीओ ने कहा कि विभागीय प्रक्रिया के तहत सभी दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट संबंधित उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि बिना तथ्यों की पुष्टि के भ्रामक खबरें प्रसारित न करें।


