Netagiri.in___कोरबा/पाली। जनपद पंचायत पाली एक बार फिर गंभीर आरोपों की जद में आ गया है। पूर्व जनपद सदस्य मिर्जा कय्यूम बेग ने डीएमएफ योजना के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम और हितग्राही सामग्री वितरण के नाम पर करीब 15 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को मय-दस्तावेज ज्ञापन सौंपा है।

कय्यूम बेग का कहना है कि वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में प्रशिक्षण व सामग्री वितरण के लिए क्रमशः 1.89 करोड़, 5.83 करोड़ और 7.18 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर न कोई प्रशिक्षण हुआ और न ही सामग्री वितरित की गई। उनके अनुसार, पूरा मामला “कागज़ी कार्रवाई के जरिए किए गए भारी भ्रष्टाचार” का है। भूपेंद्र सोनवानी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की गवर्नमेंट के दौरान से आज तक पदस्थ हैं लेकिन इतने बड़े भ्रष्टाचार के बाद भी उनके ऊपर आज तक आंच नहीं आई है
कांग्रेस सरकार से पदस्थ सीईओ पर कमीशनखोरी और मनमानी के आरोप
जनपद पंचायत पाली के सीईओ भूपेन्द्र सोनवानी पर पहले भी सरपंच-सचिवों ने कमीशनखोरी, कार्य रोकने और मनमानी का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं ने भी 10% कमीशन की शिकायत प्रशासन तक की थी, लेकिन अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बेग ने कहा कि जानकारी प्राप्त करने के लिए 5 माह पहले जमा किए गए आवेदनों और शुल्क के बावजूद सीईओ सोनवानी जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और गहरी हो रही है।
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“सोनवानी ने 13 करोड़ का चेक बिना जांच जारी किया” – बेग
बेग के अनुसार, 15 करोड़ की स्वीकृति तात्कालीन सीईओ व्ही.के. राठौर के समय हुई थी। राठौर के स्थानांतरण और गिरफ्तारी के बाद, करीब 13 करोड़ के चेक सीईओ सोनवानी ने बिना किसी सत्यापन के जारी कर दिए।
कय्यूम बेग ने कहा—
“अगर सोनवानी ईमानदार अधिकारी हैं, तो पांच महीने बाद भी मांगी गई जानकारी क्यों नहीं दे रहे?”
सीईओ का पक्ष

सीईओ भूपेन्द्र सोनवानी ने कहा—
“एजेंसियों को भुगतान मैंने किया है, लेकिन क्या सिर्फ चेक काट देने से भ्रष्टाचार साबित हो जाता है?”
जांच की मांग तेज
बेग ने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में माँग की है कि—
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
जांच पूरी होने तक सीईओ सोनवानी को पाली से अन्यत्र भेजा जाए
उनका कहना है कि सीईओ के पद पर बने रहने से निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।


