
Netagiri.in__बिलासपुर/आरंग। महानदी के तट पर अवैध उत्खनन का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। स्वीकृत क्षेत्र से अधिक खुदाई और बिना पर्यावरण अनुमति खनन को लेकर ग्रामीणों द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन के जवाब पर असंतोष जताया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए।
दो वर्षों से जारी अवैध खनन
ग्राम पंचायत निसदा के अंतर्गत पिछले दो वर्षों से 15 चूना पत्थर खदानों के बिना पर्यावरण स्वीकृति संचालित होने की शिकायत ग्रामीणों ने की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि रायपुर कलेक्टर, खनिज विभाग और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद कार्रवाई केवल जुर्माना वसूली तक सीमित रही।
जल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा
निसदा स्थित महानदी बैराज महासमुंद तथा आरंग-रायपुर क्षेत्र की जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। इसके बावजूद खदानों का मलबा नदी तट पर डंप किया जा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों से कटिंग पत्थर नदी में डाले जाने से महानदी की चौड़ाई तेजी से सिमट रही है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगी तो बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
औचक निरीक्षण में मशीनें जब्त
प्रशासन का दावा है कि खनिज विभाग की टीम ने समोदा, कागदेही और हरदीडीह रेत खदान क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर मोटर बोट सक्शन मशीन (पनडुब्बी) और चेन माउंट मशीन जब्त की है। कागदेही रेत खदान को सील कर खनन कार्य बंद कराया गया है।
हाईकोर्ट की दो टूक
हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अवैध रेत खनन, भंडारण और परिवहन के मामलों में केवल जुर्माना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मुख्य सचिव को अवैध खनन पर सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बड़ा सवाल
जब न्यायालय के निर्देश स्पष्ट हैं, तो कार्रवाई केवल जुर्माने तक क्यों सीमित रही?
क्या प्रशासन शपथपत्र में ठोस कदमों का प्रमाण प्रस्तुत कर पाएगा, या महानदी अवैध खनन माफियाओं की गिरफ्त में ही रहेगी?



