
Netagiri.in___रायपुर/अभनपुर। भारतमाला सड़क परियोजना में मुआवजा वितरण से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे अभनपुर के पूर्व तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और गोबरा नवापारा के पूर्व नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों अधिकारियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे पूछताछ जारी है।
जमानत याचिका खारिज, संपत्ति कुर्की की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन राहत नहीं मिली। इससे पहले विशेष न्यायालय ने उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था। उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया भी न्यायालय में विचाराधीन है।
फर्जी दस्तावेजों से बढ़ाया गया मुआवजा
जांच एजेंसियों के अनुसार रायपुर–विशाखापट्नम एवं दुर्ग बायपास मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान सुनियोजित तरीके से रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। राजस्व अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अधीनस्थ कर्मचारियों, पटवारियों और कथित भू-माफियाओं के साथ मिलकर फर्जी कागजात तैयार किए। जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर मुआवजा राशि कई गुना बढ़ाकर दर्शाई गई।
43 करोड़ की गड़बड़ी, 78 करोड़ भुगतान दर्शाया
प्राथमिक जांच में लगभग 43 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता सामने आई है। जमीन का वास्तविक मुआवजा करीब 29.5 करोड़ रुपये आंका गया था, लेकिन रिकॉर्ड में 78 करोड़ रुपये तक का भुगतान दर्शाया गया।
अभनपुर के नायकबांधा और उरला गांवों में जमीन को 159 खसरों में बांटकर 80 नए नाम जोड़े गए, जिससे 559 मीटर जमीन की कीमत कई गुना बढ़ गई।
अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई
मामले में पहले ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हैं और आने वाले दिनों में और खुलासे संभव बताए जा रहे हैं।



