छत्तीसगढ़ —-कोरबा__जिला खनिज न्यास मद (DMF) में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में लक्ष्मी चौहान एवं अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद अब जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद गठित तीन सदस्यीय जांच समिति के समक्ष आज कोरबा कलेक्ट्रेट में दर्जनों ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और याचिकाकर्ताओं ने पेश होकर DMF फंड में कथित घोटाले की विस्तृत शिकायतें दर्ज कराईं।
हाईकोर्ट के आदेश पर गठित समिति के सामने शिकायतों की झड़ी
हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास और भू-विस्थापितों के कल्याण के लिए बने DMF फंड का नियमों के विपरीत उपयोग किया जा रहा है। इसी के मद्देनज़र कोर्ट के निर्देश पर गठित समिति ने आज कोरबा कलेक्ट्रेट में सुनवाई कर याचिकाकर्ताओं और प्रभावितों के बयान दर्ज किए।

मुख्य याचिकाकर्ता लक्ष्मी चौहान, सपुरन कुलदीप और अजय श्रीवास्तव ने समिति को बताया कि किस तरह प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी कर DMF राशि का बंदरबांट किया गया।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने खोली पोल
सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
जनप्रतिनिधि:
बसंत कुमार कंवर (जनपद सदस्य, कटघोरा)
अनिल टंडन (जनपद सदस्य, पाली)
ग्राम सरपंच:
गौरी बाई (बेलटिकरी)
विष्णु बिंझवार (रलिया)
लोकेश कंवर (हरदीबाजार)
समिति एवं ग्रामीण प्रतिनिधि:
अनुसुइया राठौर (भू-विस्थापित कामगार सहकारी समिति)
रुद्र दास महंत (नराई बोध)
सतीश कुमार (भैरोताल)
देवेंद्र कुमार (पुनर्वास ग्राम गंगानगर)
सहित दर्जन भर अन्य ग्रामीणों ने DMF फंड के दुरुपयोग को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
43 प्रभावित गांवों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों ने समिति के समक्ष आरोप लगाया कि कोयला खदानों से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित 43 गांवों की स्थिति आज भी बदहाल है। विशेष रूप से उन 13 गांवों का उल्लेख किया गया जिन्हें करीब 7 वर्ष पहले ‘आदर्श गांव’ घोषित किया गया था, लेकिन आज तक वहां कोई ठोस बुनियादी विकास कार्य नहीं हो पाया।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की कि नियमविरुद्ध कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए और DMF राशि का उपयोग केवल भू-विस्थापितों और प्रभावित क्षेत्रों के वास्तविक विकास में किया जाए।
15 दिनों में रिपोर्ट, 30 जनवरी को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई
जांच समिति, जिसमें
उपायुक्त विकास हरिशंकर चौहान,
उपायुक्त राजस्व स्मृति तिवारी,
लेखा अधिकारी स्मिता पांडे शामिल हैं,
सभी शिकायतों का संकलन कर रही है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। वहीं, इस मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 30 जनवरी को अगली सुनवाई तय की है।
अब यह मामला प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और कानूनी रूप से भी बेहद संवेदनशील बन चुका है। सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट में किन अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की सिफारिश होती है।


