रायपुर में WhatsApp से 3 करोड़ की साइबर ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह के 5 आरोपी गिरफ्तार; 1.38 करोड़ रुपये होल्ड

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में व्हाट्सएप पर फर्जी पहचान बनाकर दो कंपनियों से करीब 3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम और प्रोफाइल फोटो का दुरुपयोग कर एकाउंटेंट को मैसेज भेजे और बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवा ली। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, ठगी की रकम में से 1 करोड़ 38 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड कराए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी महाराष्ट्र के उल्हासनगर और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले हैं। दोनों घटनाओं में ठगी का तरीका एक जैसा था। आरोपियों ने अधिकारियों की फर्जी व्हाट्सएप पहचान बनाकर कंपनी के कर्मचारियों को निशाना बनाया।
टिकरापारा में राठी बंधु कंपनी से 93 लाख की ठगी
पहला मामला थाना टिकरापारा क्षेत्र का है। राठी बंधुस कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विजय राठी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 19 से 21 अक्टूबर के बीच अज्ञात व्यक्ति ने उनके नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर कंपनी के एकाउंटेंट लेखराम चक्रधारी को व्हाट्सएप मैसेज भेजा।
मैसेज में बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। इसे वास्तविक समझकर एकाउंटेंट ने कंपनी के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते से 93 लाख रुपये बताए गए खाते में भेज दिए। शिकायत पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया।
तेलीबांधा में कंपनी को 2 करोड़ रुपये का नुकसान
दूसरा मामला थाना तेलीबांधा क्षेत्र का है। मैग्नेटो मॉल स्थित ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के मुताबिक, अज्ञात व्यक्ति ने कंपनी के अधिकृत व्यक्ति अंशुल शर्मा के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर एकाउंटेंट बिरेश तिवारी को व्हाट्सएप संदेश भेजा। इसमें टी-के कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। एकाउंटेंट ने इसे वास्तविक निर्देश समझकर बैंक ऑफ बड़ौदा की पंडरी शाखा स्थित कंपनी के खाते से ऑनलाइन रकम हस्तांतरित कर दी।
उल्हासनगर और प्रयागराज से आरोपियों की गिरफ्तारी
दोनों मामलों की जांच एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा टिकरापारा और तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीमों ने की। पुलिस ने मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप प्रोफाइल और बैंक खातों की तकनीकी जांच की। इसके बाद आरोपियों की लोकेशन महाराष्ट्र के उल्हासनगर और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मिली।
उल्हासनगर में दबिश देकर पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, तीन एटीएम कार्ड और तीन पासबुक जब्त किए गए।
वहीं, प्रयागराज से विनय श्रीवास्तव और विनोद कुमार को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से वारदात में इस्तेमाल दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। दोनों को प्रयागराज न्यायालय से जमानत पर रिहा किया गया है। पुलिस उन्हें आगे की विवेचना के लिए रायपुर लाने की प्रक्रिया कर रही है। एक अन्य आरोपी को रायपुर में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
दोनों ठगी के मामलों में एक ही गिरोह की संलिप्तता
पुलिस जांच में सामने आया है कि टिकरापारा मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की तेलीबांधा में हुई 2 करोड़ रुपये की ठगी में भी संलिप्तता है। दोनों मामलों के बीच समान तरीके और बैंक खातों के कनेक्शन की विस्तृत जांच की जा रही है।
1 करोड़ 38 लाख रुपये बैंक खातों में होल्ड
पुलिस ने बैंकों के साथ समन्वय कर ठगी की रकम में से कुल 1 करोड़ 38 लाख रुपये होल्ड कराए हैं। इसमें टिकरापारा मामले के 24 लाख रुपये और तेलीबांधा मामले के 1 करोड़ 14 लाख रुपये शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
थाना टिकरापारा प्रकरण:
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आकाश कन्हैया लाल चुथ, उम्र 20 वर्ष, निवासी उल्हासनगर, ठाणे (महाराष्ट्र)।
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साहिल रमेश नथानी, उम्र 23 वर्ष, निवासी उल्हासनगर, ठाणे (महाराष्ट्र)।
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राज चन्दर लाल जुमानी, उम्र 23 वर्ष, निवासी उल्हासनगर, ठाणे (महाराष्ट्र)।
थाना तेलीबांधा प्रकरण:
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विनय श्रीवास्तव, उम्र 47 वर्ष, निवासी मीरापुर, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)।
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विनोद कुमार, उम्र 49 वर्ष, निवासी कालीबाड़ी, मुट्ठीगंज, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)।
WhatsApp पर फर्जी बॉस के मैसेज से ऐसे बचें
पुलिस ने कंपनियों और आम लोगों को इस तरह की साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है।
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पैसे भेजने से पहले कॉल करें: व्हाट्सएप पर अधिकारी के नाम से मैसेज आने पर उनके वास्तविक नंबर पर फोन करके पुष्टि करें।
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दोहरी मंजूरी रखें: बड़ी रकम के ट्रांजेक्शन के लिए कंपनी में दो अधिकृत व्यक्तियों की स्वीकृति अनिवार्य करें।
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नंबर की जांच करें: केवल नाम और प्रोफाइल फोटो देखकर किसी व्हाट्सएप अकाउंट को वास्तविक न मानें।
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जल्दबाजी के दबाव में न आएं: ‘अभी पैसे भेजो’, ‘बहुत अर्जेंट है’ या ‘किसी को मत बताना’ जैसे संदेशों से सतर्क रहें।



