
Netagiri.in___एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शामिल एसईसीएल की गेवरा परियोजना एक बार फिर कोयला लिफ्टिंग को लेकर बड़े विवाद में घिर गई है। बीती रात खदान परिसर में कोयला लिफ्टिंग कार्य को लेकर दो निजी कंपनियों के बीच हुई हिंसक झड़प में कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद खदान क्षेत्र में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल है।


सूत्रों के अनुसार गेवरा खदान में कोयला लिफ्टिंग का कार्य कर रही दिलीप सिंह की कंपनी के.के. एंटरप्राइजेज का लंबे समय से प्रभाव बना हुआ है। आरोप है कि कोयला लिफ्टिंग को लेकर अन्य कंपनियों पर लगातार दबाव बनाया जाता रहा है, जिससे आए दिन तनाव की स्थिति उत्पन्न होती रही है। खदान में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी भी इस स्थिति से असहज बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बीती रात राजा हिन्डा की केपीएल (KCPL) कंपनी के कोयला लिफ्टिंग कर्मचारियों और के.के. एंटरप्राइजेज से जुड़े लोगों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि के.के. एंटरप्राइजेज से जुड़े कथित बाउंसरों ने केपीएल कंपनी के कर्मचारियों के साथ जमकर मारपीट की, जिससे कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। हालात बिगड़ने पर दोनों पक्षों में भारी हाथापाई हुई।
घटना की सूचना मिलने के बाद दीपका थाना में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, वहीं घायलों का उपचार जारी है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
सूत्रों का कहना है कि एसईसीएल के एसेंशियल विभाग, विशेषकर डिस्पैच सेक्शन में वर्षों से कुछ अधिकारी-कर्मचारी एक ही पद पर जमे हुए हैं। एलआई, टीआई और डिस्पैच इंचार्ज जैसे महत्वपूर्ण पदों पर लंबे समय से ट्रांसफर नहीं होने के कारण डीओ होल्डरों से इनके कथित आर्थिक संबंधों की चर्चा जोरों पर है। यही वजह बताई जा रही है कि अधिकारी किसी भी कंपनी पर प्रभावी कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि एसईसीएल प्रबंधन चाहे तो इस तरह की घटनाओं में शामिल कंपनियों को ब्लैकलिस्ट, उनकी गाड़ियों को सीज कर सख्त कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी जानबूझकर मूकदर्शक बने रहते हैं।
सीआईएसएफ की भूमिका पर भी सवाल
खदान क्षेत्र में बाउंसरों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद बाउंसरों की मौजूदगी सामने आना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में सीआईएसएफ की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। आरोप है कि बाउंसरों की मौजूदगी से भय और उत्पात का माहौल जानबूझकर बनाया जा रहा है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब एक वर्ष पूर्व पाली क्षेत्र में भी कोयला लिफ्टिंग को लेकर इसी तरह की हिंसक झड़प सामने आई थी, लेकिन उस समय इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। अब गेवरा की इस घटना के बाद आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में दीपका क्षेत्र में भी हालात बिगड़ सकते हैं।


