
कोरबा/छत्तीसगढ़__छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्पष्ट रूप से आदेश जारी किए गए हैं कि ग्राम पंचायतों में किसी भी प्रकार के सरपंच प्रतिनिधि की नियुक्ति अथवा मान्यता पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कोरबा जिले की जनपद कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत बासिन में शासन के आदेशों की खुलेआम अवहेलना देखने को मिल रही है।
ग्राम पंचायत बासिन में अघोषित सरपंच प्रतिनिधि अलीम मोहम्मद द्वारा पंचायत के कार्यों में लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि पंचायत से जुड़े दस्तावेजों पर लगातार उसी के हस्ताक्षर सामने आ रहे हैं, जिससे पंचायतवासी आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की निर्वाचित सरपंच और सचिव भी इस अघोषित प्रतिनिधि के आगे नतमस्तक नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पंचायत भवन के भीतर लगाए गए बैनरों में भी सरपंच प्रतिनिधि के रूप में अलीम मोहम्मद का फोटो लगाया गया है और पंचायत के अधिकांश कार्य उसी के इशारे पर संचालित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में ठेका प्रथा हावी है और वास्तविक निर्वाचित सरपंच की भूमिका केवल नाममात्र की रह गई है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। गंभीर आरोप यह भी है कि सरकारी पंचायत पोर्टलों पर भी अली मोहम्मद का नाम, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी दर्ज है, जबकि नियमों के अनुसार यह अधिकार केवल निर्वाचित सरपंच और पंचायत सचिव तक सीमित होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना जनपद पंचायत के कर्मचारियों की मिलीभगत के यह प्रविष्टियां आखिर कैसे दर्ज की गईं?

ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल जनपद पंचायत कोरबा में बैठे बाबुओं की मेहरबानी और सांठगांठ से चल रहा है। इससे पहले प्रकाशित खबरों के बाद काम का भुगतान होने के बावजूद कार्य शुरू न करने की शिकायत पर जनपद पंचायत कोरबा के सीईओ ने नोटिस जारी कर काम तो शुरू करवा दिया, लेकिन अघोषित प्रतिनिधि की पकड़ अब भी ढीली नहीं पड़ी है।

सरकारी पोर्टल और दस्तावेजों में लगातार नाम दर्ज होने से अघोषित प्रतिनिधि के हौसले बुलंद हैं और पंचायत पर उसका कब्जा बना हुआ है। इसे लेकर ग्रामवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे मांग कर रहे हैं कि शासन के आदेशों की अवहेलना करने वालों पर तत्काल कठोर कार्यवाही की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगा?
या फिर अघोषित प्रतिनिधियों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?



