ADANI - HALF PAGE_page-0001
ADANI - HALF PAGE_page-0001
छत्तीसगढ़प्रशासनिक

सक्ति में फर्जी अंकसूची का बड़ा खेल! दो शिक्षकों पर गंभीर आरोप, जांच अधिकारी पर भी मिलीभगत का संदेह


Netagiri.in___सक्ति/छत्तीसगढ़।
जिले के शिक्षा विभाग में फर्जी अंकसूची के जरिए नौकरी पाने का गंभीर मामला सामने आया है। शासकीय हाई स्कूल सुखापाली एवं सिंघीतराई (विकासखंड डभरा, जिला सक्ति) में पदस्थ शिक्षक रामसुन्दर बियार और रामचन्द्र बियार पर नियुक्ति के समय फर्जी विश्वविद्यालय अंकसूची प्रस्तुत करने का आरोप लगा है। मामले की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता जितेन्द्र कुमार साहू द्वारा उच्च अधिकारियों से की गई है।
जांच पर उठे सवाल
शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, सक्ति द्वारा 11 जून 2024 को शासकीय उमावि कटकोनी के प्राचार्य प्यारे लाल साहू को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
बताया जा रहा है कि 1 जुलाई 2024 को जांच अधिकारी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें दोनों शिक्षकों को क्लीन चिट दे दी गई। इसके आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने शिकायत को निराधार मानते हुए समाप्त कर दिया।
हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने शिक्षकों से सांठगांठ कर उन्हें बचाने का प्रयास किया। अब इस पूरे प्रकरण की दोबारा उच्च स्तर पर शिकायत की गई है।
आरटीआई से हुआ कथित फर्जीवाड़े का खुलासा
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
रामसुन्दर बियार पर आरोप
नियुक्ति के समय प्रस्तुत अंकसूची:
बी.एससी. अंतिम वर्ष 2011 – गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर
एम.एससी. (वनस्पति शास्त्र) 2014 – बिलासपुर विश्वविद्यालय
आरोप है कि सेवा पुस्तिका में बाद में बदलाव करते हुए:
बी.एससी. अंतिम वर्ष 2012 – विलियम कैरी यूनिवर्सिटी, शिलांग (मेघालय)
एम.एससी. 2014 – मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर (मुक्त एवं दूरवर्ती शिक्षा)
दर्ज कर दिया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि नियुक्ति के समय जमा की गई मूल अंकसूचियां पूर्णतः फर्जी थीं।
रामचन्द्र बियार पर भी समान आरोप
नियुक्ति के समय प्रस्तुत अंकसूची:
एम.ए. अंतिम वर्ष (अंग्रेजी) 2014 – बिलासपुर विश्वविद्यालय
आरोप है कि बाद में सेवा पुस्तिका में हेराफेरी कर:
एम.ए. अंतिम वर्ष (अंग्रेजी) – मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर (मुक्त एवं दूरवर्ती शिक्षा कार्यक्रम)
दर्ज कर दिया गया।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, नियुक्ति के समय प्रस्तुत अंकसूची को भी फर्जी बताया गया है।
राजनीतिक एवं प्रशासनिक पहुंच का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों शिक्षकों ने अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच तथा धनबल के माध्यम से विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर दस्तावेजों में हेराफेरी कराई।
अब क्या होगा आगे?
मामले की दोबारा उच्च स्तर पर शिकायत किए जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शिक्षा विभाग में बड़ी प्रशासनिक चूक और आपराधिक कृत्य माना जाएगा।
फिलहाल विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

Netagiri

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!