Netagiri.in —-छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, शाखा टर्रीपारा नगर कोरबा से एक लाख रुपये का ऋण लेने के बाद समय पर भुगतान नहीं करने और चेक बाउंस हो जाने पर आरोपी ललित कुमार डोंगरे को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने बैंक को ₹45,600/- का चेक अदायगी हेतु दिया था, जो अपर्याप्त राशि (Insufficient Funds) के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक की ओर से विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए प्रकरण दर्ज कराया गया।
कोरबा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई:
जिसमें 1 माह की सश्रम कारावास ₹75,000/- का अर्थदंड, जो शिकायतकर्ता बैंक को क्षतिपूर्ति के रूप में देना होगा
प्रमुख विवरण—ऋण की राशि: ₹1,00,000/-,चेक की तारीख: 24 अक्टूबर 2018 ,फैसला सुनाया गया: 30 जुलाई 2025 प्रकरण संख्या: 72/2019
मामले में बैंक की तरफ से श्री शामांक उपाध्याय ने पैरवी की वही फैसले के बाद लोगों ने माना कि यह निर्णय वित्तीय अनुशासन के लिए एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बैंक से ऋण लेकर जानबूझकर भुगतान न करना और बाउंस चेक देना, गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।


