
Netagiri.in–कोरबा। बांकी मोंगरा थाना के बलगी क्षेत्र में युवा पत्रकार अरविंद राठौर के साथ हुई मारपीट, लूट और जानलेवा हमले की घटना को कई माह बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े होने लगे हैं। पीड़ित पत्रकार के अनुसार, घटना के दौरान करीब 14 से 15 युवकों ने उन्हें घेरकर मारपीट की और हथियारनुमा वस्तु दिखाकर धमकाया था।
जानकारी के अनुसार, बुधवारी बायपास क्षेत्र में एएसआई के बेटे को बोलेरो वाहन से कुचलने के आरोप से जुड़ी घटना की जानकारी जुटाने और आरोपियों का पीछा करने के दौरान पत्रकार अरविंद राठौर को बलगी क्षेत्र में रोक लिया गया। आरोप है कि करीब 14-15 युवकों ने उन्हें घेरकर लाठी-डंडों से मारपीट की। कट्टा दिखाकर धमकाया गया। हमले में गंभीर रूप से घायल पत्रकार को सड़क किनारे छोड़ दिया गया। पीड़ित ने अपने पास मौजूद नकदी, आईफोन और सोने के जेवर लूटे जाने का भी आरोप लगाया था। घटना के बाद घायल पत्रकार को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची और जांच शुरू किए जाने की बात कही गई। लेकिन कई माह गुजरने के बाद भी मुख्य आरोपी सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित और पत्रकार समुदाय में नाराजगी है। हाल ही में कटघोरा थाना पुलिस द्वारा ठगी के आरोपियों तक पहुंचने के लिए पीड़ित के पैसे से रेल के बजाय हवाई यात्रा किए जाने का मामला सामने आया था। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस की तत्परता चर्चा में रही। ऐसे में पत्रकार अरविंद राठौर पर हमले के मामले में लंबे समय से आरोपियों के खुले घूमने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि जब हमले में शामिल आरोपियों की संख्या 14 से 15 बताई जा रही है, तो अब तक उनकी पहचान और गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी? क्या बांकी मोंगरा पुलिस के पास आरोपियों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सुराग नहीं हैं, या फिर मामले की जांच अपेक्षित गति से नहीं चल रही है? या फिर क्या बाँकी मोंगरा पुलिस भी पीड़ित अरविन्द से आरोपियों को पकड़ने हवाई यात्रा करना चाह रही है। फिलहाल पुलिस की ओर से मामले की जांच जारी होने की बात कही जा रही है। अब देखना होगा कि महीनों से लंबित इस मामले में पुलिस कब तक आरोपियों तक पहुंचती है और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए क्या ठोस कार्रवाई करती है।


