
Netagiri.in,___Renujaiswal**..नई दिल्ली___77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय परेड के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की बैठने की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी को वीआईपी दीर्घा में पीछे की पंक्ति में बैठाए जाने पर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई है और इसे प्रोटोकॉल व परंपरा के विरुद्ध बताया है।
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष को तीसरी पंक्ति में बैठाया गया, जो संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के साथ इस तरह का व्यवहार शालीनता और परंपरा के खिलाफ है।

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह प्रोटोकॉल और गरिमा की स्पष्ट अनदेखी है। वहीं कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने सवाल उठाया कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को आगे की पंक्ति में स्थान क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को ‘शैडो प्रधानमंत्री’ भी कहा जाता है और उनका एक निश्चित प्रोटोकॉल होता है।
क्या कहता है प्रोटोकॉल?
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोहों में अतिथियों की बैठने की व्यवस्था वॉरंट ऑफ प्रिसीडेंस (क्रम वरीयता सूची) के आधार पर तय की जाती है। यह सूची राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी की जाती है और गृह मंत्रालय इसके रखरखाव का दायित्व संभालता है।
लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष इस सूची में शामिल होते हैं, हालांकि वे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और कुछ संवैधानिक पदाधिकारियों से नीचे आते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, हर वर्ष सुरक्षा व्यवस्था, उपस्थित विशिष्ट अतिथियों की संख्या और व्यवस्थागत कारणों के चलते सीटिंग अरेंजमेंट में बदलाव संभव होता है। इसी वजह से पंक्ति संख्या में अंतर देखने को मिलता है।
हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल सीट का नहीं, बल्कि संवैधानिक पद की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

क्या कहता है प्रोटोकॉल?
