
Netagiri.in____सिमगा (छत्तीसगढ़)। फाल्गुन शुक्ल पंचमी, शके 1947, रविवार 22 फरवरी 2026 को सिमगा स्थित श्री दत्तात्रेय सिद्ध शक्तिपीठ में भगवान दत्तात्रेय की एकमुखी चतुर्भुज विग्रह की भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। यह अनुष्ठान परम पूज्य गुरुदेव सतगुरु श्री अण्णा महाराज (इंदौर) के करकमलों से संपन्न कराया गया।
इस विशेष अवसर पर बताया गया कि भगवान दत्तात्रेय की इस प्रकार की एकमुखी चतुर्भुज विग्रह की स्थापना देश में पहली और अब तक की एकमात्र मानी जा रही है। प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए भगवान दत्तात्रेय की राजधानी माने जाने वाले गाणगापुर (कर्नाटक) के निर्गुण पादुका मठ के मुख्य पुजारी वैभव पुजारी के साथ चार वेदशास्त्र निपुण आचार्यों को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने तीन दिवसीय वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराया।

मंदिर के कलशारोहण और कलश पूजा के लिए शिवशक्ति आश्रम नर्मदापुरम के संन्यासी श्री नर्मदामणि जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित हुए और उनके हस्तों से मंदिर का कलशारोहण कराया गया।
इस भव्य धार्मिक आयोजन में देश के विभिन्न स्थानों से संत-महात्मा और विद्वान उपस्थित रहे। इनमें प्रयागराज से अवधेश पाठक, चित्रकूट से शिव नरेश मिश्रा, चित्रकूटधाम, गोंदिया से योगी रामनाथ जी, कराड से अरविंद जोशी, गोरखनाथ पीठ मनु डोंगर के महंत हरिहर नाथ योगी तथा दत्त संप्रदाय के ब्रह्मलीन संत जनु मामा के सुपुत्र एवं निवृत्ति आश्रम महादेव घाट रोड के सर्वहारा भूषण अग्निहोत्री सहित अनेक संत-महात्मा और भगवान दत्तात्रेय के भक्त बड़ी संख्या में शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि श्री दत्तात्रेय सिद्ध शक्तिपीठ का निर्माण सिमगा निवासी रणजीत भोंसले एवं उनके परिवार द्वारा अपने गुरुदेव सतगुरु श्री अण्णा महाराज इंदौर की आज्ञा और मार्गदर्शन में कराया गया है।
कार्यक्रम के दौरान सतगुरु श्री अण्णा महाराज ने उपस्थित साधु-संतों का श्री दत्तात्रेय सिद्ध शक्तिपीठ सिमगा की ओर से शाल, श्रीफल और हिंदी में अनूदित ‘श्रीपाद श्रीवल्लभ चरितामृत’ ग्रंथ भेंट कर सम्मान किया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा।


