कोई इंजीनियर, तो कोई चायवाला, जानिये कैसे हैं आपके नये महापौर…सभी महापौर की दिलचस्प जानकारी बस एक क्लिक में..
छत्तीसगढ़ में सभी 10 नगर निगमों पर भाजपा का कब्जा हो गया है। कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पायी है। अंबिकापुर और चिरमिरी, जहां कांग्रेस जीत का दावा कर रही थी, वहां भी उसे शिकस्त झेलनी पड़ी। भाजपा प्रत्याशियों की जीत पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें बधाई दी है। आईये जानते हैं कैसा रहा है आपके महापौर का राजनीतिक सफर…
पूजा विधानी- बिलासपुर महापौर
54 साल की पूजा विधानी भाजपा नेता और नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष अशोक विधानी की पत्नी हैं। उनका असली नाम एल पदमजा है और वो तेलगु समाज से हैं। अशोक विधानी से इंटरकास्ट मैरिज करने के बाद पूजा विधानी के रूप में उनकी पहचान बनी। वो 1996 से भाजपा की सक्रिय सदस्य हैं। साल 1998 में पहली बार नगर निगम में पार्षद निर्वाचित हुईं।जिसके बाद दो बार भाजपा महिला मोर्चा में दो बार प्रदेश महामंत्री रहीं। फिर महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी रहीं। उनके पति अशोक विधानी साल 2004 से लगातार नगर निगम में पार्षद रहे हैं।
अल्का बाघमार दुर्ग महापौर
दुर्ग निगम महापौर अलका बाघमार ग्रेजुएट हैं। वो कई सालों से सक्रिय कार्यकर्ता हैं। दुर्ग निगम में वार्ड 7 से निवर्तमान पार्षद भी हैं। अलका महिला मोर्चा दुर्ग की महामंत्री भी रह चुकी हैं। वर्तमान में दुर्ग जिले से बीजेपी की उपाध्यक्ष हैं। भाजपा उम्मीदवार अलका बाघमार दुर्ग सांसद विजय बघेल की रिश्तेदार हैं। संगठन में वो काफी सक्रिय रही है और कई अहम जिम्मेदारी संभाली है। पार्टी के प्रति समर्पण की वजह से ही उन्हें टिकट दिया गया था। अब जीत कर उन्होंने पार्टी के फैसले को सही साबित कर दिया है।
मधुसूदन यादव राजनांदगांव महापौर
मधुसूदन यादव दूसरी बार राजनांदगांव के महापौर चुने गये हैं। रमन सिंह के बेहद करीबी माने जाने वाले मधुसूदन यादव राजनांदगांव से सांसद भी रह चुके हैं।साल 1990 से राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले राजनैतिक प्रतिभावान यादव 55 वर्ष के है। उनका बेमिसाल राजनैतिक रिकॉर्ड हैं। वे 2004 में मधुसूदन यादव पहली बार 1 साल के लिए महापौर बने थे। 2005 में फिर भाजपा से चुनाव लडक़र राजनांदगांव निगम के महापौर बने। दूसरी बार भाजपा ने उन्हें 2015 में चुनाव लडऩे के लिए अपना महापौर प्रत्याशी बनाया। 2009 में राजनांदगांव लोकसभा से चुनाव लडक़र 15वीं लोकसभा के लिए सांसद भी मधुसूदन यादव निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2014 में महापौर का चुनाव रिकार्ड 35 हजार मतों से जीता था। साल 2018 में डोंगरगांव विधानसभा सीट पर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।
रामनरेश राय चिरमिरी महापौर
रामनरेश राय पेशे से वकील और भाजपा विधि प्रकोष्ठ में पदाधिकारी के रूप में सेवा दे चुके हैं। रामनरेश राय ने पहले भी निर्दलीय पार्षद का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें मात्र चार मत प्राप्त हुए थे। इस बार बीजेपी ने उन पर भरोसा जताया था। टिकट मिलने पर कई लोग हैरान थे, लेकिन उन्होंने 4000 से ज्यादा वोटों से पूर्व विधायक डॉ विनय जाससवाल को हरा दिया।
जीवर्धन चौहान रायगढ़ महापौर
रायगढ़ के महापौर जीवर्धन चौहान बेहद साधारण पृष्ठभूमि के नेता है। 30 साल के राजनीतिक जीवन के बाद भी उनकी जीविका चाय के ठेले से चलतीहै। वो रायगढ़ के सांसद रहते विष्णुदेव साय के लिए काम करते थे। विधानसभा हो या लोकसभा? उन्होंने पार्टी से जी जान से मेहनत की।जीवर्धन चौहान का जीवन का संघर्षों से गुजरा है। उन्होंने जिले में नशा मुक्ती को लेकर भी काम किया है। जीवर्धन चौहान का मेयर बनना अब रायगढ़ में चर्चा का विषय बन गया है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि चाय बेचने वाले से कई लोग मिलते हैं. आम आदमी की समस्याओं को वे काफी अच्छे से समझ सकते हैं।
रामू रोहरा धमतरी महापौर
पार्टी के प्रदेश महामंत्री जगदीश रामू रोहरा धमतरी के महापौर होंगे। जगदीश रामू रोहरा धमतरी शहर के विवेकानंद नगर के निवासी हैं। जगदीश ने 51 साल की उम्र में बीकॉम की डिग्री प्राप्त की है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 2003 में भारतीय जनता पार्टी से हुई थी। वे पार्टी में कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे और 2010 से 2015 तक जिला कोषाध्यक्ष, 2015 से 2019 तक जिला अध्यक्ष, 2019 से 2024 तक प्रदेश मंत्री और 2024 से अब तक प्रदेश महामंत्री के रूप में कार्य करते रहे हैं।
मीनल चौबे रायपुर महापौर
महापौर बनने से पहले वो नगर निगम परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुकी हैं। पार्षद, जिला और प्रदेश महिला भाजपा मोर्चा में कई पदों पर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुकी है। मीनल चौबे तीन बार बीजेपी पार्षद रह चुकीं हैं। मीनल संगठन में भी सक्रिय है। इसी के साथ ही वे रायपुर नगर निगम के सीनियर पार्षदों में से एक है।
संजू देवी राजपूत कोरबा महापौर
संजू देवी राजपूत साल 2009 से 2014 तक पार्षद रहकर पार्टी और जनता के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाली संजू देवी राजपूत को 10 साल बाद पार्टी ने निगम के सबसे बड़े महापौर पद के लिए चुना है। पूर्वांचल क्षेत्र से आने वाली संजू देवी राजपूत पुलिस परिवार से भी आती है। पुलिस परिवार में विवाह के बाद समाज सेवा में अग्रणी भूमिका निभाने वाली संजू देवी राजपूत भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर राजनीति के क्षेत्र में अपना कदम रखा। साल 2009 में भारतीय जनता पार्टी ने इसी सक्रियता के आधार पर संजू देवी राजपूत को वार्ड क्रमांक 8 से पार्षद का टिकट दिया। जिसमें जीत दर्ज कर उन्होने क्षेत्र की समस्याओं का निदान कर स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुई। संजू देवी राजपूत के पति चंद्रमा सिंह राजपूत कोरबा में निरीक्षक के पद पर सेवा देने के साथ ही जांजगीर जिला से रिटायर हुए।
मंजूषा भगत अंबिकापुर महापौर
मंजूषा भगत 11 हजार 63 मतों से जीती है। मंजूषा भगत ने लगातार दो बार के महापौर कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अजय तिर्की को बड़े अंतर से शिकस्त दी है। वहीं, नगर निगम के 48 वार्डों में से 31 वार्डों में भाजपा, 15 वार्डों में कांग्रेस और दो वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशियों ने कब्जा किया है। भाजपा प्रत्याशी मंजूषा भगत ने 10 वर्ष पूर्व 2014 में डॉ अजय तिर्की से महापौर चुनाव में हुए हार का बदला ले लिया।
संजय पांडे जगदलपुर महापौर
संजय पांडे माइनिंग इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, बीए और एमए कर चुके हैं। संजय पांडे 4 बार बीजेपी से पार्षद रह चुके हैं. साथ ही जगदलपुर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट के साथ कोंडागांव विधानसभा क्षेत्र में प्रभारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।संजय पांडेय स्वयंसेवक, विद्यार्थी परिषद में विभाग प्रमुख, प्रदेश सह सचिव, मंत्री, तीन बीघा आंदोलन और कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा फहराने के आंदोलन में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. संजय पांडे ने अपने छात्र जीवन में दो बार अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए. साल 2004 से चौथी बार लगातार पार्षद, दो बार नगर निगम के एमआईसी और दो बार नेता प्रतिपक्ष बन चुके हैं. संजय पांडेय तीन बार विधानसभा चुनाव प्रभारी और लोकसभा चुनाव में अभिकर्ता के रूप में काम कर चुके हैं।



