कोरबा नगर निगम में हर काम के बदले 18 प्रतिशत कमीशन, कांग्रेस के महापौर पर भी लगे थे आरोप
कोरबा : कोरबा नगर निगम में निर्माण कार्यों के बदले भारी कमीशन लेने का मामला सामने आया था, जिसने न केवल नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आगामी नगर निगम चुनावों में भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ठेकेदारों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, नगर निगम के अधिकारियों ने निर्माण कार्य आबंटित करने के दौरान 18 प्रतिशत तक कमीशन तय किया था। इस घोटाले के बाद एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) ने नगर निगम के दो अफसरों के घर तलाशी कार्रवाई भी की, जिससे यह मामला और भी संगीन हो गया था।
आरोपों के अनुसार निर्माण कार्यों के लिए जब ठेके आबंटित किए जाते थे, तो अधिकारियों ने पहले ही कमीशन की राशि तय कर दी थी। ठेकेदारों का कहना है कि कार्यादेश जारी करने के बाद तीन प्रतिशत कमीशन लिया जाता था, और काम शुरू होने के बाद कनिष्ठ अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता तक को दो- दो प्रतिशत तक देना पड़ता था। इसके अलावा, एकाउंटेंट को एक प्रतिशत, आडिट शाखा और निर्माण शाखा के अधिकारियों को आधा-आधा प्रतिशत कमीशन बांटना पड़ता था। इसके साथ ही, एक जनप्रतिनिधि को एक प्रतिशत अतिरिक्त वर्कऑर्डर के दौरान देना पड़ता था, जबकि शीर्ष अधिकारी को तीन प्रतिशत कमीशन देना जरूरी था।
पांच साल भ्रष्टाचार में डूबा रहा नगर निगम
इस भ्रष्टाचार के आरोपों से महापौर राजकिशोर प्रसाद भी नहीं बच पाए हैं। उन्हें इस पूरे मामले में संलिप्त होने का आरोप लगा है। शहरवासियों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच मिलीभगत का नतीजा है, जिसने कोरबा शहर के विकास को बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले पांच सालों में शहर में विकास के कार्य ठप रहे हैं, और यह भ्रष्टाचार की वजह से निगम में चल रही अव्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।
जनता कर रही अब ये मांग
नगर निगम चुनाव में इस घोटाले का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। भ्रष्टाचार के आरोपों ने जनता का विश्वास नगर निगम के प्रशासन पर हिलाया है, और अब लोग चाहते हैं कि आगामी चुनावों में ऐसी सरकार आए, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम उठाए और शहर के विकास को प्राथमिकता दे। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को चुनावी रणनीति का हिस्सा बना लिया है, और कांग्रेस के नेतृत्व वाली नगर निगम पर इस आरोप को लेकर हमला बोलने की पूरी तैयारी कर ली है।
नगर निगम में भ्रष्टाचार के इस पूरे मामले ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। चुनावों से पहले, नगर निगम प्रशासन और महापौर राजकिशोर प्रसाद को अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देना होगा। लोगों का कहना है कि नगर निगम में पिछले पांच वर्षों में विकास कार्यों की कमी के पीछे यही भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। यह भ्रष्टाचार ना केवल शहर के विकास में बाधक रहा, बल्कि इसने नगर निगम की छवि को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त
कोरबा नगर निगम चुनाव में यह मुद्दा चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। जनता अब ऐसे नेताओं को चुनना चाहती है, जो पारदर्शिता, ईमानदारी और विकास को प्राथमिकता दें। आगामी चुनावों में यह मुद्दा एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है, और इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ कितनी सख्त है। चुनावी प्रचार में भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई और नगर निगम में पारदर्शिता लाने का वादा प्रमुख होगा, जो आगामी सरकार की दिशा तय करेगा।



